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निजामुद्दीन मरकज में लोगों के रुकने पर आया तबलीगी जमात का बड़ा बयान, बोले- CM को...


निजामुद्दीन मरकज में  लोगों के रुकने पर आया तबलीगी जमात का बड़ा बयान, बोले- CM को...

देश में कोरनावायरस का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. भारत में कोरनावायरस (COVID-19) से अबतक 32 लोगों की मौत हो चुकी है और संक्रमितों की संख्या 1251 हो गई है. बीते 24 घंटे में कोरोना के 227 मामले सामने आए हैं, वहीं एक अच्छी खबर यह है कि इसके ंसंक्रमण से 102 लोग ठीक हो चुके हैं. स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से ये जानकारी दी गई है.
निजामुद्दीन मरकज में 2000 से ज्यादा लोगों के रुकने पर आया तबलीगी जमात का बयान, बोले- CM को हकीकत मालूम होती तो...

मरकज की ओर से 25 मार्च को पुलिस-प्रशासन को चिट्ठी लिखी गई थी, लेकिन कोई जवाब नहीं आया. इस दावे को सच मानें तो 23 मार्च को जब 21 दिनों का लॉकडाउन शुरू हुआ तो प्रशासन को इस बात की जानकारी थी कि इस मरकज में सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद हो सकते हैं, इसके बावजूद इन्हें निकालने का प्रबंध ना हो पाना कई तरह के सवाल खड़े करता है.

बता दें कि लॉकडाउन के बीच जरूरतमंदों और जरूरी सामान वालों के लिए दिल्ली सरकार की ओर से विशेष पास मुहैया कराए जा रहे थे, ताकि लोग लॉकडाउन के बावजूद सफर कर सकें.

बता दें, इस अवधि के बाद भी 1,400 लोग यहां रुके हुए थे. कोरोनावायरस के चलते मरकज से अब तक कुल 860 लोगों को निकालकर अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया जा चुका है.


दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा, "अब तक वहां ठहरे हुए 24 लोगों के कोरोनावायरस पॉज़िटिव होने की पुष्टि हो चुकी है... यहां गंभीर अपराध किया गया है...
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वही तबलीगी जमात की तरफ से प्रेस स्टेटमेंट जारी किया गया है. जिसमें कहा गया कि तब्लीग-ए-जमात 100 साल से पुरानी संस्था है, जिसका हेडक्वार्टर दिल्ली की बस्ती निज़ामुद्दीन में है. यहां देश-विदेश से लोग लगातार सालों भर आते रहते है. ये सिलसिला लगातार चलता है जिसमें लोग दो दिन, पांच दिन या 40 दिन के लिए आते हैं. लोग मरकज में ही रहते हैं और यहीं से तबलीगी का काम करते है.

बयान में कहा गया है कि जब भारत में जनता कर्फ्यू का ऐलान हुआ, उस वक्त बहुत सारे लोग मरकज में रह रहे थे. 22 मार्च को प्रधानमंत्री ने जनता कर्फ्यू का ऐलान किया. उसी दिन मरकज को बंद कर दिया गया. बाहर से किसी भी आदमी को नहीं आने दिया गया. जो लोग मरकज में रह रहे थे उन्हें घर भेजने का इंतजाम किया जाने लगा. 21 मार्च से ही रेल सेवाएं बन्द होने लगी थी, इसलिए बाहर के लोगों को भेजना मुश्किल था. फिर भी दिल्ली और आसपास के करीब 1500 लोगों को घर भेजा गया. अब करीब 1000 लोग मरकज में बच गए थे.